अध्यापक और गुरु में क्या फर्क होता है?

अध्यापक और गुरु में फर्क?

हिंदी भाषा इसलिए भी अनूठी है क्योंकि इसके कुछ शब्द एक जैसे प्रतीत होते हैं पर उनके असली अर्थ में कुछ बारिक फर्क होता है।
जैसे गुरु और अध्यापक, इनमें फर्क यह है कि अध्यापक सिर्फ अध्ययन कराने से जुड़ा है जबकि गुरु अध्ययन से आगे जाकर जिंदगी की हकीकत से भी रूबरू कराता है और उससे निपटने के गुर सिखाता है।
एक अध्यापक आपको आसानी से मिल सकते हैं किंतु एक गुरु को आपको ढूंढना व अर्जित करना पड़ता है। इसको इस प्रकार से समझिए :-

मान लीजिए एक व्यक्ति किसी कारणवश एक घर की बंद चारदीवारी में फंसा है और बाहर से ताला लगा है। सर्वप्रथम उसने अपनी सहायता के लिए अपने शिक्षक को बुलाया, उसके शिक्षक उसके पास खाने योग्य कुछ सामान और कुछ पुस्तकें लेकर पहुंचे और उन्होंने उस व्यक्ति को राय दी कि खाली वक्त में तुम यह पुस्तकें पढ़ना इससे तुम्हारा मन लगा रहेगा और भूख लगे तो यह खाना खा लेना।
"यानी कि उसके शिक्षक ने उसको उस स्थिति में ढलना सिखाया।"
दूसरी दफा उसने अपनी सहायता के लिए अपने गुरु को पुकारा, तो उसके गुरु उसके पास घर की दूसरी चाबी लेकर पहुंचे और ताला खोलकर अपने शिष्य से कहा कि जाओ अब तुम आजाद हो।
"यानी कि उसके गुरु ने उसको जिंदगी के बंदिशों से मुक्त कर दिया।"
यही फर्क है एक अध्यापक और गुरु में।
-शुभम शौर्य

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