ऐ कलम!

ऐ कलम!
चल उठ और लिख ऐसी रचना
जो ललकारे पुरुषत्व को
जो दर्शाए नारी शक्ति को
वह भारत जिसे
नारी शक्ति के भक्ति से जाना जाता था,
नारी का मान सम्मान माना जाता था
स्वयं से पूछो
क्या वह भारत आज भी जिंदा है?
अरे! नासमझी तो हमारी है
भारत माता तू क्यों शर्मिंदा है?
ऐ कलम!
चल उठ और लिख ऐसी कविता
जो ललकारे अमानवीयता को
जो दर्शाए नैतिक मूल्यों को
वह भारत जिसे
मानव की मानवता से जाना जाता था,
संस्कार का भंडार माना जाता था
स्वयं से पूछो
क्या वह भारत आज भी जिंदा है?
अरे! नासमझी तो हमारी है
भारत माता तू क्यों शर्मिंदा है?

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