New Year Message
ऐ जिंदगी मुझे संभाल! एक और साल फिसल गया दिन गिनती में निकल गया लेकिन सृष्टि का समस्त कार्य अपने निश्चित समय पर हुआ फूल वक्त पर खिला, तो फल वक्त पर पका सूर्य वक्त पर उगा, तो चांद वक्त पर ढला नियमपूर्वक, दिन हुई फिर रात हुई मौसम गर्म हुआ फिर सर्द हुई धरती ने भी, ईमानदारीपूर्वक सूर्य की परिक्रमा करी मंजिलें पाकर, वीरों ने भी चैन की आहें भरी इस साल, सबने विजय का नगाड़ा बजाया लेकिन मैं जहां था, वहीं रह गया साल दर साल, एक और साल फिसल जाएगा दिन गिनती में निकल जाएगा अब तू ही कोई उपाय निकाल ऐ जिंदगी मुझे संभाल! ऐ जिंदगी मुझे संभाल! 'Shubham Saurya'